सोमवार, 16 सितंबर 2013

शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

रविवार, 8 सितंबर 2013

सुरमई शाम इस तरहा आए : मेरे स्वर में सुरेश वाडकर

सुरमई शाम इस तरहा आए,
सांस लेते हैं जिस तरहा साए :

  मेरे स्वर में सुरेश वाडकर 


गुलज़ार का ये गीत मुझे सर्वाधिक प्रिय है.. वक्त का जाना सुनाई देना .. खुशबू का नज़र से छू जाना ... पवित्रतम ह्रदय का अनुभव है यह... ये पंक्ति लिखते समय गुलज़ार स्वयं देश - काल से अतीत हो गए होंगें... 
वक्त जाता सुनाई देता है...
तेरा साया दिखाई देता है.
जैसे खुशबू नज़र से छू जाए ............ आप भी सुनिए अब मेरे स्वर में सुरमई शाम इस तरह आए...



अरविंद पाण्डेय

बुधवार, 4 सितंबर 2013